बस शरु हो गई कहानी

एक रोज़ मैंने सोचा क्यूँ ना मैं कहानी लिखना शुरू करूँ ।
अपने दर्द की कहानी तो हर कोई लिखता है पर किसी दूसरे के दर्द को बता पाना बहुत मुश्किल हैं।
इसलिए उस दर्द और प्यार कहानी कुछ अपने शब्दों में कहने की कोशिश सी हैं।
कुछ हिन्दी में हैं और कुछ  English में, उमीद  हैं आप लोगो को ये ब्लोग पसंद आए।

"शरु तो हों गई हैं इस सफ़र की , चाहें हमसफ़र मिले ना मिलें ।
जो पीछे पलट गया तू ,तो आगे कैसे बढ़े ।अब तो बस कदम कदम पर अकेलापन महसूस होगा , तेरे अकेलेपन में तेरा दर्द तेरा साथी होगा।"--अनाम

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